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Bihar Advocate General: महाधिवक्ता एसडी संजय को कैबिनेट मंत्री का दर्जा, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने महाधिवक्ता एसडी संजय को कैबिनेट मंत्री स्तर की रैंक और सुविधाएं देने का फैसला किया है। विधि विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

पटना, 21 जुलाई। आलम की खबर: बिहार सरकार ने राज्य के महाधिवक्ता सत्यदर्शी संजय (एसडी संजय) को कैबिनेट मंत्री के समकक्ष रैंक और सुविधाएं देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विधि विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद अब महाधिवक्ता को प्रशासनिक प्रोटोकॉल, सुरक्षा, सरकारी वाहन, आवास तथा अन्य सुविधाएं कैबिनेट स्तर के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि राज्य के सर्वोच्च विधि अधिकारी के पद की गरिमा और जिम्मेदारियों को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक था।

एसडी संजय जून 2026 से बिहार के महाधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे पहले वह भारत सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के रूप में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी कर चुके हैं। संवैधानिक और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। महाधिवक्ता के रूप में उनकी भूमिका राज्य सरकार को कानूनी सलाह देने, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखना तथा नीतिगत निर्णयों की कानूनी समीक्षा करना है।

सरकार के इस निर्णय के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि महाधिवक्ता को कैबिनेट स्तर की सुविधाएं मिलने से उनके कार्यालय के कामकाज और समन्वय में भी सुविधा होगी। वहीं सरकार का कहना है कि राज्य के महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की प्रभावी पैरवी और संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना प्रशासनिक दृष्टि से भी जरूरी है। आने वाले समय में राज्य सरकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में महाधिवक्ता की भूमिका और अधिक अहम मानी जा रही है।

गरिमा के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी

महाधिवक्ता का पद केवल कानूनी सलाहकार का नहीं, बल्कि सरकार और न्यायपालिका के बीच महत्वपूर्ण संवैधानिक कड़ी का भी होता है। ऐसे में यदि पद की गरिमा के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं तो उससे संस्थागत व्यवस्था मजबूत होती है। हालांकि इसके साथ जवाबदेही और निष्पक्ष कानूनी सलाह देने की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है।

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